उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने प्रदेश में अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड और फर्जी डिग्रियों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और पुलिस प्रशासन को कड़े कदम उठाने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश में मुख्य बिंदु और निर्देश दिए गए हैं, हाईकोर्ट ने कहा 150 फर्जी वकीलों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के निर्देश पर चल रहे प्रमाण पत्र सत्यपान अभियान में 150 वकीलों की कानूनी एल एल बी डिग्रियां जाली पाईं गईं हैं अदालत ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी जालसाजी और प्रतिरुपण के तहत एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।
अदालत ने लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई के भी आदेश दिए हैं जिन वकीलों के विरुद्ध जघन्य अपराधों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
उनके खिलाफ बार काउंसिल को तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर प्रैक्टिस लाइसेंस निलंबित करने को कहा गया है।
अपराधिक मामले का स्थांतरित उत्तर प्रदेश में 4,157 वकीलों के विरुद्ध कुल 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
स्थानीय न्यायलयों पर इनके प्रभाव को देखते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने आदेश दिया है कि वकीलों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को उनके गृह/प्रैक्टिस जिले से हटाकर पास के दूसरे जिलों की अदालत में ट्रांसफर किया जाए।
ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके, अदालतों में संगठित गिरोह पर तल्ख टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने चिंता जताई और कहा कि जिला न्यायालयों में ला ग्रेजुएट के कुछ संगठित गिरोह बन गए हैं।
जो कोर्ट के फैसलों को जबरन लागू करवाने अवैध कब्जे करवाने और गवाहों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं,स्टेटस रिपोर्ट मांगी अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक, डीजीपी अभियोजन और बार काउंसिल से इस पूरी कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी है।
और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए 20 अगस्त 2026 की तिथि घोषित की है, अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिवक्ता सिर्फ मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के विभिन्न अंग होते हैं।
पेशे की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कठोर कदम उठाना बेहद जरूरी है ताकि न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।