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आरक्षण आंदोलन के 22वें दिन धरना स्थल पर अराजकता, टेंट फाड़ने का आरोप

30 May 2026, 04:50 PM • By M SALEEM KHAN

बंगाली समाज के आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे “आरक्षण हमारा अधिकार” अनिश्चितकालीन आंदोलन के 22वें दिन धरना स्थल पर तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा धरना स्थल पर लगाए गए टेंट को क्षतिग्रस्त करने और आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया गया। 

साथ ही धरना स्थल के आसपास रखे गए सामानों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सुब्रत कुमार विश्वास ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस प्रकार की हरकतों से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। 

उन्होंने कहा कि बंगाली समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और चाहे कितनी भी बाधाएं उत्पन्न की जाएं, आंदोलन पीछे हटने वाला नहीं है। 

उन्होंने कहा कि “जो लोग आंदोलन को कमजोर करने का सपना देख रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह लड़ाई अब पूरे समाज की लड़ाई बन चुकी है। हम अपने अधिकार लेकर रहेंगे।”

धरना स्थल पर 22वें दिन आंदोलन की जिम्मेदारी संभाल रहे सुभाष राय तथा बड़ी संख्या में युवाओं ने भी आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 

आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले दिनों भी टेंट को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया था और अब दोबारा ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ लोग आंदोलन की बढ़ती ताकत से परेशान हैं।

इस बीच आंदोलन को देश के विभिन्न हिस्सों से भी समर्थन मिल रहा है। 22वें दिन छत्तीसगढ़ से पहुंचे रतन मंडल ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया। 

उन्होंने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों की यह लड़ाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। 

उन्होंने कहा कि यदि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया जा रहा है, तो पूरे भारतवर्ष से सहयोग मिलना चाहिए।

रतन मंडल ने यह भी कहा कि कुछ बड़े राजनीतिक नेताओं द्वारा आंदोलन से दूरी बनाए रखने के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। 

उनका कहना था कि कई नेता इस बात से चिंतित हैं कि यदि आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिल गया तो इसका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है। 

उन्होंने स्थानीय नेताओं से अपील की कि वे व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर समाज के अधिकारों की लड़ाई में सहयोग करें।

आंदोलनकारियों का दावा है कि लगातार बढ़ रहे जनसमर्थन के कारण कुछ लोगों में बेचैनी दिखाई दे रही है, जिसके चलते धरना स्थल को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। 

हालांकि आंदोलन में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाते रहेंगे।

धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने टेंट फाड़ने और आंदोलन को बाधित करने वाली घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि अधिकारों की इस लड़ाई को किसी भी साजिश या दबाव से रोका नहीं जा सकता। 

आंदोलन के 22वें दिन भी बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर पहुंचे और बंगाली समाज के आरक्षण की मांग को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया।

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