उत्तराखंड स्वास्थ्य महकमे में कार्यरत आशाओं को गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशु की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था लेकिन वहां से शुरू करते हुए आज आशा वर्कर्स को सारे काम करने पड़ रहे हैं।
लेकिन आशाओं को न ही न्यूनतम वेतन मिलता है न कर्माचारी का दर्जा और न ही पेंशन का प्रवधान है फिर भी आशाऐ स्वास्थ्य महकमे के सभी अभियानों और सर्वे में लगा दी जाती है।
राज्य सरकार आशाओं को पैंतीस सौ रुपए देती है और केंद्र सरकार से कुल दो हजार जो आज महंगाई के समय में बेहद कम है, इसी मामले को जिले भर की आशाओं ने जिला मुख्यालय रुद्रपुर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि इतना पैसा आशाओं को ट्रेनिंग में दिया जाता है और उन्हें दूर दराज से आने वाली आशाए अपना किराया भाड़ा भी दे पाती है।
आशाओं को मिलने वाला विभिन्न मदों का प्रति माह मिलने वाला पैसा छह छह महीने तक नहीं मिल रहा है जिसके कारण आशाएं बहुत दिक्कतों का सामना कर रही है।
इसके साथ साथ अस्पताल स्टाफ का व्यवहार आशाओं के प्रति आम तौर पर बेहद खराब होता है साथ हीं आशाओं को हर जगह प्रताड़ित होना पड़ता है।
नियम है कि आशा वर्कर्स को सरकारी अस्पताल में ही डिलीवरी करानी होगी आशाएं इसका पूरी तरह पालन करती है लेकिन कई बार सरकारी अस्पताल में डॉक्टर गंभीर स्थिति में या अस्पताल में उचित सुविधाएं।
उपलब्ध न होने के कारण प्राईवेट अस्पताल में दिखाने के रेफर कर देते हैं और जब आशा निजी अस्पताल में ले जाती है।
तो उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी जाती है उन्होंने कहा इस तरह की कारवाई नहीं होनी चाहिए और उन्हें उनके कार्य के अनुसार वेतन दिया जाना चाहिए।
आशाओं ने उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट को ज्ञापन सौंपा इस दौरान प्रिया, अध्यक्ष ममता पानू,जीत कौर,सरोज यादव,नीलम, सीता सहित दर्जनों आशाएं उपस्थित थीं।