JANVAANI NEWS

डॉ राधा वाल्मीकि हांगकांग में हुई सम्मानित, किया शोध-पत्र वाचन

14 Jun 2026, 10:52 AM • By M SALEEM KHAN

हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए हांगकांग में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में "वैश्विक विकास में संस्कृति और विज्ञान की भूमिका" विषय पर डॉ. राधा वाल्मीकि ने अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। 

सेमिनार में भारत के कई राज्यों से प्रोफेसर्स, रिसर्च स्कॉलर्स, और साहित्यकारों सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, और विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. राधा वाल्मीकि के विचारों की सभी ने सराहना की। 

अपने शोध-पत्र और उद्बोधन में डॉ. राधा वाल्मीकि ने कहा कि संस्कृति और विज्ञान मानव सभ्यता के विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं संस्कृति जहांँ समाज को नैतिक मूल्य, मानवीय संवेदनाएंँ और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

वहीं विज्ञान उन विचारों और आवश्यकताओं को तार्किक आधार देकर जीवन को अधिक सरल, सुगम और सुविधाजनक बनता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाकर अंतरिक्ष तक पहुंँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विज्ञान और संस्कृति का संबन्ध संतुलित विकास में सहायक होता है। विज्ञान को मानवीय संवेदनाओं से जोड़कर ही समावेशी और शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

तथा वैज्ञानिक संस्कृति के माध्यम से ही नए वैज्ञानिकों की पीढ़ी को पोषित किया जा सकता है जो रचनात्मक सोच के साथ काम करे। विज्ञान और संस्कृति का संयोजन ही आत्मनिर्भर और समावेशी वैश्विक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

डॉ. राधा वाल्मीकि ने कहा कि समय के साथ-साथ इनमें कुछ कमियांँ या विकृतियांँ आ जाती हैं जो मानवता के लिए घातक सिद्ध होती हैं। विज्ञान की कमियों को व्यावहारिक और तकनीकी स्तर पर सुधारा जा सकता है।

लेकिन संस्कृति के क्षेत्र में उत्पन्न कुछ विकृतियांँ लंबे समय तक समाज को प्रभावित करती रहती हैं। जैसे कठोर पारंपरिक सामाजिक कुरीतियांँ और जाति प्रथा। 

जो हजारों वर्षों से समाज में मौजूद है और आज भी इसके दुष्प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाए हैं। 

ऐसी कुरीतियों को दूर करने के लिए समाज को सकारात्मक सोच और सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाना होगा। 

उन्होंने कहा कि विज्ञान और संस्कृति दोनों का निर्माण मनुष्य ने किया है इसलिए इसमें मौजूद कर्मियों को दूर करने की जिम्मेदारी भी मनुष्य की ही है।

 कार्यक्रम के बाद डॉ. राधा वाल्मीकि के इन विचारों की सभी ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।

शोध पत्र वाचन के उपरांत डॉ. राधा वाल्मीकि को स्मृति चिन्ह अंग वस्त्र और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

तथा हॉलीडे टर्मिनस टूरिज्म मकाउ एंड हांगकांग टूर, जून 2026 के शैक्षिक भ्रमण के संयोजक श्री मनीष सुंदरियाल के द्वारा डॉ. राधा वाल्मीकि को इंस्पायरिंग ट्रैवलर अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। 

विदित हो कि डॉ. राधा वाल्मीकि ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए 75 प्रतिशत दृष्टि खोने के बावजूद भी अपने बुलंद हौसले के दम पर यह सब उपलब्धियांँ हासिल कर देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

अपनी इस उपलब्धि के लिए डॉ. राधा वाल्मीकि ने सेमिनार के संयोजक साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन, दिल्ली के अध्यक्ष मनोज कुमार एवं शैक्षिक भ्रमण के संयोजक मनीष सुंदरियाल का आभार व्यक्त किया।

वतन वापसी पर डॉ. राधा वाल्मीकि को परिजनों सहित सभी ने उनकी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी तथा उनके अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Read Original Article