विद्युत संविदा कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश की जिला इकाई ने मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपकर अनुबंधित कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
संगठन का कहना है कि प्रथम और द्वितीय सर्कल में कार्यरत कंपनियां नियमों के खिलाफ काम कर रही हैं, जिससे संविदा कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
संघ ने मुख्य रूप से चार मांगें उठाई हैं: पहली, पावर कॉरपोरेशन के आदेशानुसार हर महीने की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए, क्योंकि 19 तारीख बीतने के बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है।
दूसरी, छंटनी के नाम पर हटाए गए अनुभवी कर्मचारियों को ही खाली पदों पर प्राथमिकता देकर दोबारा नियुक्त किया जाए और नए लोगों को रखने की मनमानी बंद हो।
तीसरी, कर्मचारियों को तत्काल सुरक्षा किट और आई-कार्ड उपलब्ध कराए जाएं ताकि क्षेत्र में हो रहे हादसों पर रोक लग सके।
चौथी, मैनपावर का इस्तेमाल सब-स्टेशनों के बजाय अधिकारियों के निजी कामों और ऑफिस कार्यों में करना बंद किया जाए।
जिला अध्यक्ष गुलशन चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
तो संगठन अग्रिम आंदोलन और कार्रवाई के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और कंपनियों की होगी।