JANVAANI NEWS

मसूरी में बारिश ने छीना गांव का रास्ता प्रशासन का इंतजार करती रही सड़क

10 Jul 2026, 08:33 PM • By SUNIL SONKAR

लगातार हो रही बारिश ने मसूरी क्षेत्र के खेतवाला गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से लगभग तोड़ दिया है। 

भारी वर्षा के चलते गांव को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होकर बंद हो गया है। 

सड़क बंद होने के बाद जहां प्रशासन की ओर से मार्ग बहाल करने के लिए तत्काल कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी, वहीं गांव की महिलाओं ने खुद मोर्चा संभाल लिया। 

आने-जाने का कोई रास्ता न बचने पर महिलाओं ने झाड़ियां काटकर पैदल आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया। 

ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।

ग्रामीणों के अनुसार लगातार बारिश के कारण खेतवाला गांव का संपर्क मार्ग जगह-जगह से धंस गया और कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह बह गई। 

इससे गांव का आवागमन बाधित हो गया है। सड़क बंद होने से सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, रोजाना काम पर जाने वाले मजदूरों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है। 

आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है और लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क बंद होने के बाद उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों को सूचना दी, लेकिन समय पर राहत नहीं मिलने से महिलाओं ने स्वयं झाड़ियां और घास काटकर पैदल चलने लायक रास्ता बनाया।

ताकि बच्चे स्कूल जा सकें और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। महिलाओं का यह प्रयास ग्रामीणों के संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल तो बना।

लेकिन साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा तो बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। 

आपातकालीन सेवाओं के गांव तक पहुंचने का रास्ता लगभग बंद हो चुका है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो बरसात के दौरान गांव का संपर्क पूरी तरह कट सकता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत, मलबा हटाने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।

उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 

लोगों का कहना है कि जब ग्रामीण महिलाएं अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना रास्ता बनाने को मजबूर हों।

तो यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की भी तस्वीर है।

Read Original Article