पिछले साठ दिनों शहर के रविन्द्र नाथ टैगोर पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे बंगाली समाज के युवाओं का खून आज खौल उठा।
आंदोलन से जुड़े सैकड़ों युवाओं ने देश युवाओं ने अपने खून से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चिठ्ठी लिखकर बंगाली समाज को आरक्षण देने की मांग को बुलंद किया गया।
पिछले 60 दिनों से चल रहे इस आंदोलन आज नया मोड़ ले लिया।
जब बंगाली समाज के युवाओं ने पीएम और सीएम को अपने खून से आरक्षण देने की मांग की पुरजोर वकालत करते हुए सरकार पर बंगाली समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया।
आंदोलनकारियों का था कि यह सिर्फ किसी संगठन का आंदोलन नहीं है।
बल्कि पूरे देश में बसे में बसे पुनर्वासित बंगाली समाज के सम्मान पहचान और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है पिछले साठ दिनों से रविन्द्र नाथ टैगोर पार्क में शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी है।
इस दौरान समाज के युवाओं ने कठिन परिस्थितियों प्रशासनिक दबाव विरोध और अनेक चुनौतियों के बाद भी आंदोलन लगातार जारी रखा समाज के लोगों का कहना है।
कि जब लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के बाद सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती तब आंदोलन को नये चरण में ले जाना जरूरी है।
रक्त हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से युवाओं ने सरकार तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया है अब संघर्ष केवल ज्ञापन और नारों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि समाज अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर हर संभव प्रयास करेगा।
युवाओं ने कहा कि उनके रक्त की प्रत्येक बूंद समाज के सम्मान समानता और आने वाली युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए समर्पित है, बंगाली समाज ने अपने पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि पचिछ्म बंगाल,असम।
त्रिपुरा और मेघालय की तर्ज पर पूरे भारत में पुनः वरसित बंगाली समाज को एक देश एक कानून की भावना के अनुरूप अनुसूचित जाति एससी का दर्जा प्राप्त है।
तो अन्य राज्यों में उसी समुदाय को इस अधिकार से वंचित रखना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है इसलिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
बंगाली समाज ने अपने अधिकारों के लिए इस लडाई को आर-पार लडाने का ऐलान किया, इस दौरान सुब्रत कुमार विश्वास,किरन पांडेय विश्वास, संजय आईस,सुब्रत चक्रवर्ती, अभिमन्यु साना, सहित कई लोग मौजूद थे।
गरीब कारोबारियों के रोजगार हमला कर रहे हैं महापौर विकास शर्मा -डा सुब्रत चक्रवर्ती
आंदोलन के 60वे दिन वरिष्ठ समाजसेवी डॉ सुब्रत चक्रवर्ती ने जमकर महापौर विकास शर्मा की कार्यप्रणाली पर सवालिया लगाए।
उन्होंने कहा मेयर विकास शर्मा छोटी कारोबारियों के रोजगार छीनने पर आमादा हो गये है,डा चक्रवर्ती ने कहा मेयर विकास शर्मा संविधान के दायरे में रहकर काम नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने फरमान जारी कर दिया कि मंगलवार को मीट मांस की दुकानें बंद रहेगी लेकिन मेयर बड़े बड़े कारोबारियों पर पूरी तरह मेहरबान है।
उन्होंने केएफसी जैसे बड़े दुकानदारों को पूरी छूट दे रखी है और लघु व्यवसाय करने वाले का उत्पीडन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा अगर मेयर को मीट मांस की दुकानों को मंगलवार को बंद करवाना है तो बड़े उद्योगपतियों पर अंकुश लगाना चाहिए उन्होंने आज तक कितने मेयर आए और चले गए।
किसी ने इस तरह का फरमान जारी नहीं किया उन्होंने स्पष्ट कहा कि मंगलवार की छोटे दुकानदार के घरों में चूल्हा केसे जलागे मेयर को इस बात पर गंभीरता से सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा अगर आपको फिर से किसी बड़े पद पर आसीन होना है तो गरीब कारोबारियों को अहम प्राथमिकता देनी होगी।
नहीं आगामी चुनावों में जनता आपसे जवाब मांग सकती है उन्होंने अन्य कई मुद्दों पर मेयर विकास शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आड़े हाथों लिया।