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आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन के तहत सुब्रत कुमार विश्वास एवं युवाओं ने कराया मुंडन

08 Jun 2026, 10:25 AM • By M SALEEM KHAN

बंगाली समाज के अधिकारों की मांग को लेकर चल रहे "आरक्षण हमारा अधिकार" आंदोलन के तहत आंदोलनकारी युवाओं ने अपना सिर मुंडवाकर सरकार के प्रति विरोध दर्ज कराया।

कार्यक्रम का नेतृत्व समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास ने किया। इस दौरान डॉ. सुनील हालदार, सुभाष राय, निपेन विश्वास, राजू विश्वास, धीरज विश्वास सहित अनेक युवाओं ने मुंडन कराकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मुंडन के दौरान एकत्रित किए गए बालों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं विभिन्न जनप्रतिनिधियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा जाएगा।

ताकि बंगाली समाज की मांगों और संघर्ष की आवाज देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंच सके।

इस अवसर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। 

उन्होंने कहा कि एक ही देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग अधिकार और व्यवस्थाएं होना सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। 

बंगाली समाज ने देश की आजादी, राष्ट्र निर्माण, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन इसके बावजूद आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।

सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा, “आरक्षण हमारा अधिकार है और हम अपने अधिकारों को प्राप्त करके रहेंगे। यदि आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। 

बंगाली समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हमें आमरण अनशन जैसे कठिन कदम भी उठाने पड़ें तो हम उसके लिए तैयार हैं। गरीब, मजदूर, किसान और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए हमारा जीवन भी समर्पित है।”

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल उत्तराखंड की नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष के उन बंगालियों की लड़ाई है, जो विभिन्न राज्यों में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

चाहे ओडिशा हो, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, उत्तर प्रदेश या अन्य राज्य, जहां बंगाली समाज अपने अधिकारों से वंचित महसूस कर रहा है, वहां के लोगों की आवाज को भी यह आंदोलन बुलंद करेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज का यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है। आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित सुभाष राय ने कहा कि बंगाली समाज के अधिकारों के लिए यदि उन्हें अपना जीवन भी देना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। 

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समाज का आंदोलन है और समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।

सुभाष राय ने कहा कि आज बंगाली समाज के लोगों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों और दस्तावेजों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार समाज के लोगों को अपनी पहचान और दस्तावेजों को सिद्ध करने के लिए अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

उन्होंने कहा कि समाज इस प्रकार की परेशानियों का विरोध करता है और सभी नागरिकों के लिए समान व्यवहार तथा सम्मान की अपेक्षा करता है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश तथा देश के विभिन्न राज्यों में निवासरत बंगाली समाज के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। 

साथ ही समाज के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित कर लंबित मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित युवाओं ने एक स्वर में कहा कि "आरक्षण हमारा अधिकार है" और समाज अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर संघर्ष जारी रखेगा।

मुख्य रूप से उपस्थित

किशोर हालदार, अभिमन्यु साना, सुब्रतन कुमार, डॉ. अली, प्रजापति आर. दास, प्रमोद अली सलमानी, श्याम दत्त लोधी, ओमप्रकाश लोधी, मनीष गुप्ता।

अमल मंडल, तरुण विश्वास, निलेश खान, गोपाल मंडल, सुब्रत कुमार विश्वास, डॉ. सुनील हालदार, सुभाष राय, निपेन विश्वास, राजू विश्वास, धीरज विश्वास एवं अन्य युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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