उत्तर प्रदेश के हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, गैंगस्टर योगेश मलिक उर्फ भदौरिया को ऊधम सिंह नगर से शिकंजे में लिया गया था।
योगेश मलिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई।
योगेश मलिक की गिरफ्तारी के बाद कुछ दिनों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने आई टी आई कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम राठौड़ को लाइव हाजिर कर दिया।
पुलिस महकमे से जारी आदेश में कार्रवाई का आधार पुलिस कार्यों के पर्यवेक्षण शिकायतों के निस्तारण तथा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही को बताया गया था।
उत्तराखंड पुलिस ने आपरेशन प्रहार के अंतर्गत गैंगस्टर की गिरफ्तारी की अधिकारिक पुष्टि करते हुए गैंगस्टर के कब्जे से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद होने की बात कही गई है। वहीं दूसरी तरफ के दावे तेजी से वायरल हुए जिनमें गिरफ्तारी की परिस्थितियों कथित आधुनिक हथियारों उत्तर प्रदेश एस टी एफ की भागीदारी और अन्य गंभीर आरोपों का वर्णन किया गया।
हालांकि इन वायरल दावों की पुष्टि न तो उत्तराखंड पुलिस और न ही एस टी एफ व ही किसी अन्य सूक्ष्म सरकारी एजेंसियों द्वारा आधिकारिक तौर पर की गई है।
वहीं पुलिस महकमे की ओर से जारी लाइन हाजिर आदेश में भी ऐसी कोई वजह का जिक्र नहीं किया गया है।
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल दावों का बहरहाल आधिकारिक तथ्य सामने नहीं आ आया है यह पूरा प्रकरण एक बार फिर यह दर्शाता है कि अपराध के खिलाफ कार्रवाई जितनी ज़रूरी है।
उतना ही जरूरी है पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता जवाबदेही और साक्ष्यों सूचना सार्वजनिक होना चाहिए।
किसी भी कुख्यात अपराधी के बाद उठने वाले सवालों का समाधान सिर्फ अधिकृत तफ्तीश और आधिकारिक साक्ष्यों से संभव नहीं है न कि अस्पष्ट वर्णनों या।
सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल करने से अगर भविष्य में इन प्रकरणों में कोई विभागीय जांच आधिकारिक स्पष्टीकरण या अन्य जानकारी सामने आती हैं तो उसी के मुताबिक स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।