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उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के केदारनाथ बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी को लेकर आर एस एस और भारतीय जनता पार्टी पर भागीदारी का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ नगर कांग्रेस कमेटी ने एक दिवसीय उपवास रखा।उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष ममता रानी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की अगुवाई में तमाम कांग्रेसियों ने शिव मंदिर 84 घंटा रम्पुरा में एकत्र हुए और उन्होंने चढ़ावा चोरी के खिलाफ उपवास शुरू कर दिया।महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने कहा उत्तर प्रदेश के अयोध्या का राम मंदिर और बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड की धार्मिक आस्था का प्रतीक है ऐसे में इन धार्मिक स्थलों से चढ़ावा और सोना चोरी और हेरा फेरी दिखाता है कि इसमें भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस की मिली भगत है।जो हिंदुओं की आस्था पर खुलेआम डाका है उन्होंने कहा जिस प्रकार से इन धार्मिक स्थलों से चोरी की गई है वह सनातन धर्म और राम भक्तों के साथ धोखा है तथा धार्मिक आस्थाओं पर चोट से।पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाना चाहिए।उन्होंने कहा ऐसे धार्मिक स्थलों पर की गई चोरी यह दिखाती है कि भाजपा और आर एस एस धर्म के नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।लेकिन अब जनता इन्हें भली भांति समझ गई है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी इस दौरान आनंद शर्मा, सियाराम कोली, ज्योति टम्टा।उमा सरकार,बेबी सिकंदर, सुनील चुग, पार्षद शुभम दास, अशीष श्रीवास्तव, दिनेश कोली, कुंवर पाल कोली, जमुना प्रसाद कोली, रामसेवक कोली,देवी कोली, सेवाराम, दयाराम, सोमपाल।पार्षद राजू कोली, गब्बर कोली, शिवराज, मुकेश, वेद प्रकाश, अंकित श्रीवास्तव,विघाराम, मूलचंद, जमुना लाल, सावित्री देवी, सेवाराम, मोहन कुमार, पूर्व पार्षद मोहन कुमार सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।
बदरीनाथ धाम मंदिर कथित चढ़ावा चोरी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया हैं. त्रिवेंद्र सिंह रावत ने न सिर्फ इस पूरे प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग भी कर दी है।दरअसल, प्रदेश में इन दिनों बदरीनाथ धाम में हुई दान चोरी को लेकर जबरदस्त चर्चाएं चल रही है. इस मामले में लगे आरोपों को लेकर जांच की भी बात कही जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग हो रही है।इन सभी मांगों और चर्चाओं के बीच भाजपा के ही सांसद और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ऐसा बयान दिया है जो सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला है।त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दान चोरी मामले को लेकर निष्पक्ष जांच करने की मांग उठा दी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से बदरीनाथ में दान चोरी होने की बातें सामने आई है, वह बेहद ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है।इस दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मामले में ऐसी जांच करने की बात कही है, जिस पर सभी को भरोसा हो. उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बार फिर अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में लाए गए देवस्थानम बोर्ड पर फिर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भले ही इस बोर्ड को स्थापित ना किया गया हो, लेकिन वह आज भी यही मानते हैं कि प्रदेश में मंदिरों के प्रबंधन के लिए देवस्थानम बोर्ड होना ही चाहिए. त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी चुटकी ली है।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भी उठाए सवाल: वहीं इस मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि जिन लोगों पर दान में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं।उन्हीं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच समिति का हिस्सा बनाया गया है, जो न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है. उन्होंने इस स्थिति को बिल्कुल वैसी बताया जैसे बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी गई हो।गोदियाल ने कहा कि इस प्रकार गठित जांच समिति से निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद बिल्कुल नहीं की जा सकती है. उन्होंने मांग उठाई कि इस पूरे प्रकरण की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए।जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें ताकि जनता और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम हो सके, अगर राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति है तो जांच प्रक्रिया के निगरानी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए।पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करने का मौका था लेकिन जिस तरह पहले भी केदारनाथ स्वर्ण मामले में जरूरी कदम नहीं उठाए गए, उसी तरह इस प्रकरण में भी सरकार की मंशा संदिग्ध दिखाई पड़ रही है जब बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायकों पर ही गंभीर आरोप लग रहे है. ऐसे में इस तंत्र से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल किया गया है।जिस कारण जांच की पारदर्शिता खुद ही समाप्त हो जाती है. कांग्रेस पार्टी ऐसी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगी, कांग्रेस पार्टी इस प्रकरण में पारदर्शी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करती है।
सरकार के फ़ैसलों का विरोध करना या उसके ख़िलाफ़ नारे लगाना किसी नागरिक को किसी क्षेत्र से निकालने का वैध आधार नहीं हो सकता।बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी करते हुए सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के ख़िलाफ़ जारी एक्सटर्नमेंट ऑर्डर (किसी व्यक्ति को किसी इलाक़े या ज़िले से बाहर रखने/निकालने का आदेश) को रद्द कर दिया।जस्टिस माधव जामदार ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।पुलिस ने सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के महाराष्ट्र महासचिव और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार सईद चौधरी को एक साल के लिए मुंबई और आसपास के इलाक़ों से बाहर करने का आदेश दिया था।जज ने सवाल उठाया कि 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद' और 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे कार्रवाई का आधार कैसे बन सकते हैं।माफ़ी चाहते हैं, हम इस स्टोरी का कुछ हिस्सा लाइटवेट मोबाइल पेज पर नहीं दिखा सकते.आप अगर पूरी स्टोरी देखना चाहते हैं तो हमारे फुल वर्ज़न पर जाएं।उन्होंने देशभर में हाल के परीक्षा पेपर लीक के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों का भी ज़िक्र किया. सुनवाई के दौरान जज ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह हैं, किसी मंत्री के अधीन काम करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं।उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नागरिकों को सरकार के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ विरोध और आंदोलन करने का अधिकार है।सिर्फ़ विरोध प्रदर्शन करने या नारे लगाने के आधार पर पुलिस किसी व्यक्ति को उसके अपने शहर से बाहर करने का आदेश नहीं दे सकती।जस्टिस माधव जामदार ने सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के ख़िलाफ़ एक्सटर्नमेंट ऑर्डर को रद्द कर दिया।'विरोध करना नागरिकों का अधिकार है'लीगल मामलों की न्यूज़ वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस जामदार ने कहा, "यह क्या हो रहा है? सभी नागरिकों को भारत सरकार का ग़ुलाम बनाया जा रहा है।वे विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने पेपर लीक हो चुके हैं. अगर लोग विरोध करें, तो आप उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज कर देंगे... यह क्या है?''विरोध करना नागरिकों का अधिकार है. याचिकाकर्ता ने सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद' और 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए थे. नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? सिर्फ़ ऐसे नारे लगाने पर एक्सटर्नमेंट ऑर्डर कैसे जारी किया जा सकता है?"जस्टिस माधव जामदार ने एक्सटर्नमेंट ऑर्डर को रद्द कर दिया और कहा कि यह आदेश केवल इसलिए पारित किया गया क्योंकि चौधरी ने विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया और उनमें हिस्सा लिया।आदेश में कहा गया, "भारत सरकार के कुछ फ़ैसलों का विरोध करने मात्र के आधार पर चौधरी को निर्वासित करने की कार्रवाई याचिकाकर्ता के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन करती है।मुंबई उपनगर के चेंबूर निवासी सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), बाबरी मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद।वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार और ईंधन क़ीमतों में वृद्धि जैसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में सक्रिय रहे हैं।उनकी याचिका में कहा गया कि अक्तूबर 2025 में महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (एमपीए) के तहत उनके ख़िलाफ़ एक्सटर्नमेंट की कार्यवाही शुरू की गई थी।यह कार्रवाई 2019 से 2024 के बीच उनके ख़िलाफ़ दर्ज कई एफ़आईआर के आधार पर शुरू की गई।सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस माधव जामदार के फ़ैसले की प्रशंसा करते हुए एक्स पर लिखा है।यह दिखाता है कि अब भी ऐसे जज मौजूद हैं, जिनमें सरकार से सवाल पूछने और नागरिकों के अधिकारों के पक्ष में खड़े होने का साहस है. सराहनीय।
एक तरफ जहां बीजेपी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने का जश्न मना रही है तो वहीं कांग्रेस उस पर तंज कस रही है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच साल के कार्यकाल पर कांग्रेस का बयान आया है. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 5 साल और भाजपा सरकार के साढे नौ सालों के कार्यकाल को दिशाहीन और जन विरोधी बताया है।प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सीएम धामी इलेक्टेड नहीं बल्कि हाईकमान के सिलेक्टेड मुख्यमंत्री हैं।गणेश गोदियाल ने सरकार के कामकाज को पूरी तरह विफल बताया है।उन्होंने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री या सरकार महज झूठी बयान बाजी और विज्ञापनों के दम पर इतिहास में जगह नहीं बना सकती है।सीएम धामी के पांच साल के कार्यकाल पर गणेश गोदियाल का तंज़आप मुख्यमंत्री जरूर हैं. आप कह रहे है कि आप तिवारी से ज्यादा समय तक सीएम रहे।लेकिन आपको जानकारी होगी का आप इलेक्टेड नहीं बल्कि सिलेक्टेड मुख्यमंत्री हैं. आप अपने आला कमान की पंसद हो सकते हैं।गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड कांग्रेसगोदियाल ने कहा कि इतिहास हमेशा धरातल पर किए गए कामों से दर्ज होता है. सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए।उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है और एक लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज प्रदेश की जनता पर चढ़ाने का काम किया है।उन्होंने कहा कि साल 2017 में कांग्रेस ने जब सत्ता छोड़ी थी, तब राज्य का कर्ज लगभग 40 हजार करोड़ था।लेकिन आज भाजपा शासन काल के कु प्रबंधन के कारण उत्तराखंड राज्य एक लाख करोड़ से अधिक के कर्ज के जाल में डूब चुका है।गणेश गोदियाल का आरोप है कि सरकार राजस्व के नए स्रोत खोजने में पूरी तरह नाकाम रही है।बुनियादी क्षेत्रों की भारी उपेक्षा की गई है. राज्य का बजट केवल आंकड़े की बाजीगरी है. इधर विकास केवल कागजों और होर्डिंग तक सीमित रह गया है।गोदियाल ने कहा कि विकास के मुद्दों पर सरकार पूरी तरह से फेल हुई है।अब मुख्यमंत्री धामी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ध्रुवीकरण की राजनीति पर उतर आए हैं। जनता का ध्यान भटकाने के लिए केवल तीखी बयानबाजी और नफरत का एजेंडा चलाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में अंतर्विरोध सीएम धामी से संभाला नहीं जा रहा है. धामी कैबिनेट का हाल यह है कि भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।और सरकार में कांग्रेस पृष्ठभूमि से आए नेताओं का दबदबा है. यह साफ दर्शाता है कि भाजपा के पास नेतृत्व का अभाव है।गोदियाल ने मुख्यमंत्री धामी को नसीहत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी को यह समझ लेना चाहिए कि इतिहास में नाम दर्ज कराने के लिए जनता के हित में बड़े और दूरगामी फैसले लेने पड़ते हैं।उत्तराखंड की जनता आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है. युवा बेरोजगार हैं और प्रदेश कर्ज में डूबा चला जा रहा है।ऐसे में महज चुनावी बयानबाजी से कभी इतिहास नहीं बनता है. इतिहास सिर्फ ठोस जनहित के कामों से ही लिखा जाता है।गणेश गोदियाल ने महिला सुरक्षा और अंकिता भंडारी हत्याकांड पर भी सरकार को घेरा है और कहा कि अब तक अंकिता प्रकरण में सीबीआई की जांच कहां तक पहुंची, इसे अब तक सरकार सार्वजनिक नहीं कर पाई है। वीआईपी का नाम उजागर होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, उल्टा ऐसे व्यक्ति का देवभूमि में स्वागत करके पहाड़ की बेटियों का अपमान किया जा रहा है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत रुद्रपुर पहुंचे जहां उन्होंने शहर के सिटी क्लब में वरिष्ठ कांग्रेसियों के साथ एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया।इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में सूबे की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी पर जमकर निशाना साधते हुए भाजपा सरकार को जनविरोधी क़रार देते हुए जमकर घेरा।हरीश रावत ने कहा कि राज्य में मंहगाई, बेरोजगारी, प्लान और महिला उत्पीडन में वृद्धि हुई है, उन्होंने उत्तराखंड में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर भी भाजपा सरकार पर तीर चलाए हरीश रावत ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में कांग्रेस सत्ता में वापसी कर रही है।रावत ने कहा कि भाजपा के शासन में मंहगाई चरम पर है जिसकी वजह से आमजन की कमर टूट गई है।बेरोजगारी चरम पर है युवा रोजगार की तलाश में धक्के खा रहे हैं और सरकार रोजगार सृजन के खोखले दावे कर रही है, उन्होंने कहा कि राज्य से लगातार पलायन हो रहा है लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।रावत ने कहा महिला सुरक्षा को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं के प्रति अपराधों में वृद्धि हुई है सरकार इस गंभीर मुद्दे से पूरी तरह विफल साबित हो रही है।इसके अलावा व्यापारियों और किसानों की समस्याओं की बात करते हुए हरीश रावत ने कहा कि बीजेपी सरकार उनकी घोर उपेक्षा कर रही है।व्यापारी विभिन्न प्रकार की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज के वक्त में भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन गया है।उन्होंने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार उजागर हो रही है लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।जिसके चलते जनता का सरकार से भरोसा उठ गया है, उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में मंहगाई, बेरोजगारी,पलायन, महिला उत्पीडन, व्यापारी उत्पीड़न और किसानों की अनदेखी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी कांग्रेस इन जनसरोकार को अपना प्रमुख चुनावी एजेंडे में शामिल करेगी।रावत ने कहा कि कांग्रेस के भीतर किसी तरह की गुटबाजी नहीं और जब अच्छे दिन आते हैं तो सभी लोग एक मंच पर आ जाते हैं उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस के अच्छे दिन आने वाले हैं।संगठन के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर संगठन को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं, उन्होंने कहा कि संगठन में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है।सभी मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने का काम करेंगे, इस दौरान किच्छा विधायक तिलक राज बेहड, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, महानगर अध्यक्ष ममता रानी, पूर्व सांसद प्रतिनिधि साज़िद ख़ान।मोहन लाल खेड़ा, पूर्व दर्जा मंत्री हरीश बाबरा, सोफिया नाज सहित तमाम कांग्रेसी नेता मौजूद थे, इससे पहले हरीश रावत के रुद्रपुर पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया।
आखिरकार शहर विधायक शिव अरोरा के करीबी भाजपा नेता विकास सागर के खिलाफ अवैध वसूली के प्रकरण में रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया, जनपद ऊधम सिंह नगर में चर्चित डंपरों से वसूली प्रकरण में रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्यवाही करते हुए विकास सागर के विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है, लंबे समय से चल रही उठक पटक के बाद और राजनीतिक दबाव के बाद ऊधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देशों के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता विकास सागर के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, इस प्रकरण में बीते कुछ महीनों से जिले में सियासी पारा हाई चल रहा था, पुलिस महकमे और विपक्षी और सत्ता पक्ष के बीच घमासान मचा हुआ था, कुछ दिनों पहले राम सिंह नामक शख्स ने पुलिस को दी तहरीर में हैरान कर देने वाले आरोप लगाते हुए कहा था कि बीजेपी नेता विकास सागर खनन के डंपरों को बिना किसी रोक-टोक संचालन और पुलिस कार्रवाई से बचाने के नाम पर प्रवेश के नाम पर डंपरों से वसूली के नाम पर 70 हजार रुपए हर महीने वसूली किया करता था, विकास सागर ने आश्वासन दिया करता था कि डंपरों के प्रवेश में किसी तरह का पुलिस हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, और किसी तरह की कानूनी कार्रवाई अमल नहीं लाई जाएगी, अवैध वसूली के इस प्रकरण उस समय सामने आया जब पुलिस ने ओवरलोडिंग इसके खिलाफ मोर्चा खोला दिया और ओवरलोडिंग डंपरों की धरपकड़ तेज कर दी, और डंपरों को सीज करने की कार्रवाई की पुलिस ने एक ओवरलोडिंग डंपर को सीज किया तो अवैध वसूली का यह प्रकरण सामने आया और ओवरलोडिंग डंपरों से अवैध वसूली के कांड का पर्दाफाश हो गया, और इन डंपरों से वसूली प्रकरण के गहरे राज सामने आ गये, और इस मामले को पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई की मांग को शिकायत पत्र देकर इस प्रकरण में सख्त कार्रवाई की मांग उठाई, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित कई उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र ही इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग उठाई और इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी, इस दौरान पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने पुलिस महकमे को चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में आकर कोई कार्रवाई नहीं करती है तो इसके खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगे, और जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे, इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए इस मामले की जांच के आदेश दिए थे, करीब एक महीने तक चली जांच पड़ताल के बाद और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के निर्देश पर रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय सहित की धारा 303(2), और धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है, पुलिस का कथन है कि इस अवैध वसूली के प्रकरण में कुछ अन्य लोगों की भूमिका की जांच पड़ताल की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।